गोवा में देखने लायक पर्यटन स्थल

गोवा में देखने लायक पर्यटन स्थल

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  • Goa History | गोवा इतिहास
  • पणजी(panaji goa)
  • श्री मंगेश(shri mangeshi goa)
  • वास्को-डी-गामा(vasco da gama goa)
  • ओलड गोवा(old goa)
  • बंतुला(betul goa)
  • गोवा केसे पहुचे | How to reach goa
  • Goa Weather

 

Goa History | गोवा इतिहास

गोवा प्राचीन काल में गोमांचल, गोकपाटन, गोपाकपुरी, गोआपूरी, गोमांतक आदि नामों से विख्यात रहा है | इसकी लंबी इतिहासिक परंपरा रही है | पहली शताब्दी में गोवा सातवाहन साम्राज्य का अंग था | इसके बाद कदंब राष्ट्रकूट मान्यखेत, चालुक्य तथा सिलाहर राजवंशो का इस पर राज्य रहा |

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14वीं शताब्दी के अंत में दिल्ली के खिलजी वंश ने इस पर अपना अधिकार कायम कर लिया | सन् 1498 में पुर्तगाली नाविक वास्को डी गामा द्वारा भारत के लिए समुद्री मार्ग की खोज के बाद पुर्तगाली भारत पहुंचे | सन् 11510 में अल्फांसों द अलबुकर्क ने गोवा पर कब्जा कर लिया | सन् 1542 में संत फ्रांसिस्को के आगमन के बाद गोवा में धर्म परिवर्तन का काम आरंभ हुआ | 17वीं शताब्दी में कुछ क्षेत्रों को छोड़कर पूरे गोवा पर पुर्तगालियों का आधिपत्य था |

भारतीय प्रायद्रिप की पश्चिमी तट पर स्थित है | इसके उत्तर में तैरेखोल या अरौदम नदी बहती है | दक्षिण में कर्नाटक का उत्तरी कन्नड़ जिला, पूर्व में पश्चिमी घाट और पश्चिम में अरब सागर है | गोवा में 36 द्रिप है, जिनमें से तिसवादी द्रिप समूह प्रसिद्ध है |

गोवा मुख्यत कच्चा लोहा तथा मैग्नीज का निर्यात करता है | चावल यहां की मुख्य फसल है, इसके अलावा दाल, रागी तथा अन्य खाध फसलें भी यहां उगायी जाती है | नारियल, काजू, सुपारी गन्ना,  अनन्नास, आम और केले का भी उत्पादन होता है |
 

गोवा में देखने लायक पर्यटन स्थल

पणजी(panaji goa)

पणजी(panaji goa)

पणजी वर्तमान समय में गोवा की राजधानी है, जोकि मंडला के तट पर स्थित एक सुंदर नगर है | प्राचीनकाल में इस स्थान पर बीजापुर के सुल्तान आदिल शाह का अस्तबल था जो कालांतर में विकसित होकर नगर के रूप में परिवर्तित हुआ | 12 अगस्त 1987 को संसद द्वारा विधेयक पास करने के पश्चात गोवा को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ व पणजी को इसकी राजधानी बनाने का गौरव प्राप्त हुआ |

इस नगर की एक मुख्य विशेषता यह है कि प्रत्येक इमारत के घर की छत ढलवा तथा लाल रंग की है | यह स्थान चूंकी काफी लंबी समयावधि तक पुर्तगालियों के अधीन रहा है | इसलिए यहां पुर्तगाली संभ्यता तथा ईसाई धर्म का प्रभाव स्पष्टत परिलक्षित होता है |

पणजी में कई दर्शनीय स्थल है | 16वीं शताब्दी में निर्मित बाम जिसस चर्च विशेष रूप से उल्लेखनीय है | इस चर्च में संत जेवियर का पार्थिव शरीर ताबूत में रखा हुआ है | अन्य दर्शनीय स्थलों में अगोड़ा का किला, केसरवाला जल प्रपात, मेयम झील, महावीर राष्ट्रीय प्राणी उधान, वन्य वन्यजीव अभ्यारण तथा गोवा संग्राहलय प्रमुख है |

पणजी राजपथीय या शहर है | समूचा शहर राजपथों के दोनों ओर स्थित है | ऐतिहासिक व नवीन इमारतों का यहां सम्मिश्रीण है पणजी में | आदिल शाह का अस्तबल, इडालको राजमहल जहां आज सचिवालय है, अब्बे फारिया की मूर्ति, आजाद मैदान, शहीद स्मारक, महालक्ष्मी मंदिर, एलटीनो पहाड़, दोना पावला, मिशमर, कोलवा बीच, पावला के उस पर वास्को आदि पर्यटकों का दिल हर लेते हैं |

कुटीर उधोगों द्वारा हाथी दांत व कछुये की खाल से बनाई गयी वस्तुएं, काजू, बादाम, दालचीनी आदि भी पर्यटकों को विशेष रुप आकृष्ट करती है |

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श्री मंगेश(shri mangeshi goa)

श्री मंगेश(shri mangeshi goa)

यह गोवा 400 वर्ष प्राचीन आदिदेव मंदिर के लिये प्रसिद्ध है | यह मंदिर पहाड़ों के मध्य में स्थित है | निकट ही श्री महालसा मंदिर, 1713 ई. में निर्मित श्री शांतादुर्गा मंदिर श्री रामनाथ मंदिर दर्शनीय स्थल है |

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वास्को-डी-गामा(vasco da gama goa)

वास्को-डी-गामा(vasco da gama goa)

यहां भारतीय लौहपथगामनी (रेल) का अंतिम पहाड़ है | एकमात्र हवाई अड्डा होने का सेहरा भी वास्को-डी-गामा को ही बंधा है | यहां आने के लिये पावला से स्टीमर उपलब्ध है |
 
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ओलड गोवा(old goa)

ओलड गोवा(old goa)

पुर्तगालियों के आगमन से पूर्ण भी गोवा एक विकसित शहर था | आदिलशाह ने इस अपनी दूसरी राजधानी बनाया था | उस समय ओलड गोवा किले की दीवारों से घिरा हुआ था | उसमें बहुत से मंदिर, मस्जिद व आदिलशाह का विशाल राजभवन था |

वर्तमान में भूतकालीन गोवा का कुछ भी शेष नहीं है | मात्र राजमहल के विशाल दरवाजे का एक हिस्सा ही शेष है 1510 ई. में पुर्तगालियों ने यहां पूराना कुछ नहीं छोड़ा बर्बरतापूर्वक मंदिर मस्जिदों को गिराकर उनकी जगह गिरजाओ का निर्माण कर ओलड गोवा का रंग रुप ही बदल दिया |

आज यहां जो कुछ भी दृष्टि गोचर होता है वह सब पुर्तगाल की ही देन है | बर्बरतापूर्वक 1543 ई. में महामारी के प्रकोप ने शहर की जनसंख्या का अधिकांश हिस्सा छीन लिया | फिर 16वीं शताब्दी के अन्य में ब्रिटिश, फ्रैच व डच लोगों ने पुर्तगालियों की समुद्री ताकत को कब्ज़ा लिया | 1635 ई. में एक बार फिर महामारी का प्रकोप गोवा पर बरस पड़ा, यदि पुर्तगाली ब्रिटिश लोगों के साथ संधि में न बंधे होते तो गोवा का विलय डच ब्रिटिश राज्य में हो चुका होता |

गोवा शहर चलते-चलते 19वीं शताब्दी के प्रथम चरण में दाखिल हुआ और पुर्तगालियों के पूर्वी राज्य गोवा दमन दीप भारत में इंडोनेशिया में निर्माण, चीन में मैको तक फैल गया | किंतु 1843 ई. में राजधानी का पंजिम शहर से हस्तांतरण तथा 1834 ई. में धार्मिक कारणों से यह शहर अलग-थलग पड़ गया |

आज यह भाग गाँव में बडे गिरजा घर तथा इमारते है | जिसका उपयोग मात्र पर्यटक के लिये हैं | कुछ प्राचीन इमारते आज भी काम में आ रही है, कुछ को पुरातत्व विभाग संभाल रहा है | किन्तु यह इमारतें अपने आखिरी दौर में है | समय का झटका कभी भी इन्हें ध्वस्त कर सकता है |

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बंतुला(betul goa)

बंतुला(betul goa)

प्रकृति की धरोहर यह जंगल  हीरण, बाघ, सूअर, चीतों व विभिन्न जातियों के रंग बिरंगी पक्षियों का आश्रम-स्थल है | घूमने फिरने के लिये यह उत्तम स्थल है |

603 मीटर ऊँचे इस झरने से धरा पर तेजी से गिरती जलधारा दूधिया दिखाई देती है | प्राकृतिक सौंदर्य यहां अपना दरबार लगाये दर्शनार्थियों के मन को हर लेता है |

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गोवा केसे पहोचे | How to reach goa

गोवा एयर द्वारा

यदि आप वायुमार्ग से गोवा आ रहे हैं तो निकटतम अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा डबोलिम में स्थित है। डाबोलिम मुख्य हवाई अड्डा पणजी से लगभग 29 किलोमीटर दूर की दूरी पर स्थित है। यह अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे यू.के. और जर्मनी के प्रमुख घरेलू शहरों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख शहरों के साथ अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।

निकटतम हवाई अड्डा: दाबोलीम हवाई अड्डा, गोवा

गोवा के लिए शीर्ष उड़ानें
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कानपुर से गोवा उड़ान
सूरत ते गोवा उड़ान
मुंबई से गोवा उड़ान
भोपाल से गोवा उड़ान
गोवा से शीर्ष उड़ानें

रेलवे द्वारा गोवा

गोवा के प्रमुख रेलवे स्टेशनों के रूप में मार्गो के पास स्थित है, जो मार्गो में स्थित है। मुख्य रेलवे स्टेशन को मडगांव और वास्को-दा-गामा के रूप में जाना जाता है। ये रेलवे स्टेशन मुंबई के साथ और फिर देश के अन्य प्रमुख हिस्सों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।

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