हिमाचल प्रदेश में देखने लायक पर्यटन स्थल

हिमाचल प्रदेश में देखने लायक पर्यटन स्थल

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हिमाचल प्रदेश  Himachal pradesh best places

हिमाचल प्रदेश प्राचीन काल में इस क्षेत्र की जनजातियों का दास कहा जाता था | बाद की शताब्दियों में पर्वतीय हिस्सों के मुखिया लोगों ने मौर्य, कुषण, गुप्त राजवंशों की अधीनता स्वीकार की | 19वीं शताब्दी में रणजीत सिंह ने इस क्षेत्र के अनेक भागों को अपने राज्य में मिला लिया | जब अंग्रेज यहां आये,  तो उन्होंने गौरखा लोगों को पराजित करके कुछ राजाओं की रियासतों को अपने साम्राज्य में मिला लिया |

इस प्रदेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि तथा बागवानी पर आधारित है | राज्य की कार्यरात जनसंख्या का तीन चौथाई से अधिक भाग इन्हीं क्षेत्रों में लगा हुआ है | यहां की जलवायु बागवानी और नकदी फसलों के लिए शानदार अवसर उपलब्ध कराती है |



राज्य के महत्वपूर्ण खनिज है- नमक (रॉक साल्ट), स्लेट,  जिप्सम,  चूना-पत्थर,  बेराइट्स, डोलोमाइट आदि | प्रदेश के कुल क्षेत्र  के 64 प्रतिशत भाग में वन है | वन्यजीवों में कस्तूरी  हीरन, लंबा सिंह वाला जंगली बकरा, थार बकरी, सही आदि पशु और मोनल,  ट्रेगोपैन, कोकियाखा आदि पक्षी उल्लेखनिय है |  भेड़ पालन यहां का अन्य प्रमुख व्यवसाय है |

हिमाचल प्रदेश के देखने लायक पर्यटन  स्थल:-

1. शिमला :-

यह नगर  की राजधानी है, जो समुद्रतल से 2913 किम, ऊंचाई पर स्थित है | इस सुंदर पहाड़ की खोज एक अंग्रेज सैनिक द्वारा की गई थी | इस शहर ने अपना भरापूरा साम्राज्य 12 किमी. के विस्तृत शैली शिखर पर फैला हुआ है | प्रकृति ने अपना प्यार जी भर कर प्राकृतिक सौंदर्य के रुप में यहां की वादियों पर बरसाया है |

यह प्राकृतिक सम्पदा से मालामाल शैल शिखर पहले नेपाल के राजा के कब्जे में था जिसे अंग्रेजो ने मुक्ता करवाकर पटियाला के महाराजा को बतौर इनाम सौप दिया था | यहां की प्राकृतिक सुंदरता से आकर्षित होकर ही 1822 ई. में  मेजर केनेडी ने शिमला में सबसे पहला मकान बनाया व उसमें निवास किया |

हिमाचल प्रदेश 1832 ई. में भारत के सर्वप्रथम गवर्नर जनरल लॉर्ड बेंटिग भी कैनेडी हाउस में रहे फिर तो यह रिवाज ही हो गया | उनके शासनकाल में राजस्थानी 6 महीने दिल्ली व 6 महीने (गर्मियों में) शिमला होती |  ठंडे मुल्क के ब्रिटिश लोग शिमला की जलवायु में अपने देश की झलक पाते थे | अतः शिमला ब्रिटिश स्थापत्य शैली से निर्मित हुआ |

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2. कालीबाड़ी ( kalibadi himachal Pradesh ):-

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यहां पर मंदिर में मां स्यामल देवी की पूजा-अर्चना की जाती है तथा साथ में ही यह दोनों देवी की मूर्तियों जयपुर से लाकर यहां प्रतिष्ठित की गई थी | दुर्गापूजा पर विशेष उत्सव मनाया जाता है | सम्पूर्ण वातावरण बंगाली संस्कृति की भीनी-भीनी महक से ओतप्रोत है |

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3. क्राइस्ट चर्च ( kaist church himachal pradesh ):-

क्राइस्ट चर्च (kaist church himachal pradesh):-

भारत में हिमाचल प्रदेश के इस चर्च की गिनती प्राचीनतम चर्चा में की जाती है | रंगीन काँच व नक्काशीदार चर्च की शोभा देखते ही बनती है | यह चर्च 1857 ई.  में निर्मित किया गया था |

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4. अम्यूजमैंट पार्क ( amusement park himachal pradesh ):-

अम्यूजमैंट पार्क (amusement park himachal pradesh):-

हिमाचल प्रदेश का यह मनोरंजन से भरपूर पार्क 20 एकड़ भूमि पर निर्मित है | प्राकृतिक सौंदर्य के बीच विभिन्न तरह के मनोरंजन साधनों का दर्शनार्थी भरपूर आनन्द उठाते हैं |

5. आननदेल ( anand del himachal pradesh ):-

 

यह स्थल रिटायर्ड फुटबाल ग्राउंड के नाम से विख्यात है | यह प्राचीन समय के प्रमुख खेल केंद्र के रुप में जाना जाता था | हाल ही में सरारत द्वारा यहां तरह-तरह के खेल सुविधाएं उपलब्ध कराई गई है | शाम को घूमने के लिए यह स्थल उत्तम है |

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6. म्यूजियम ( museum himachal pradesh ):-

म्यूजियम (museum himachal pradesh):-

इस म्यूजियम में कॉमन शैली में निर्मित रंगकारी, मूर्तियां, कलात्मक वस्तुएँ, आदि संजोकर रखी गई है |

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7. कसौली ( kasoli himachal pradesh ):-

सोलन से मात्र 25 किमी. की दूरी पर स्थित है यह मनोरम मनोरम स्थल | यहां स्थित मंकी प्वाइट, रिसर्च सैन्टर (जहाँ कुत्ते के काटने व सांप के काटने पर दी जाने वाली जीवन-रक्षक दवा, बनाई जाती है |) शिरडी साईं नाथ व बाबा बालकनाथ जी का मंदिर आदि के लिए कसौली जाना जाता है |

8. चैल ( chail himachal pradesh ):-

यह स्थान शिमला कालका मार्ग पर सोल से 45 किमी. दूर स्थित है | यहां पर प्राकृतिक सौंदर्य पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है | यह स्थान समुद्रतल से 2250 मी. की ऊँचाई पर स्थित है | यह विश्व के सबसे ऊंचे क्रिकेट स्टेडियम के लिए जाना जाता है | यहां निर्मित वैसे पत्थरों का समर महल व गुरुद्वारा भी कम दर्शनीय नहीं है |

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9. किन्नौर ( kinor himachal pradesh ):-

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रामपुर प्राकृतिक सम्पदा से मालामाल किन्नौर का प्रवेश द्वार है | यह प्रवेश द्वार समुद्र तल से 3860  फीट की ऊंचाई पर स्थित है |

10. सराहन ( sarahan himachal pradesh ):-

सराहन (sarahan himachal pradesh):-

 

सराहन से ही मूल किन्नौर का शुभारम्भ होता है | यहां स्थित भीमाकाली के भव्य मंदिर की भव्यता में यहां का अदभुत प्राकृतिक परिवेश चार चांद लगा देता है | चारों और हिमगिरी रक्षक के रूप में विधमान हैं और मानो मां भीमाकाली के प्रसाद स्वरूप बागों में लगे किन्नौरी सेबों की रक्षा कर रहे हैं |

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11. बांग फू :-

समुद्र तल से 5361 फीट ऊंचे इस क्षेत्र में आगे जाने के लिए परमिट दिखाना पड़ता है और यह परमिट D.M. शिमला से प्राप्त किया जा सकता है | रास्ते में बुशाहर के S.D.M. से भी यह प्रवेश-पत्र हासिल किया जा सकता है | परमिट के लिए दर्शनार्थियों की तीन पासपोर्ट साइज फोटो व भारतीय नागरिक होने का प्रमाण-पत्र दिखाने की आवश्यकता पड़ती है |

12. कल्लर ( kallar himachal pradesh ):-

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यह स्थान समुद्रतल से 4900 फीट की ऊंचाई पर स्थित है | यहाँ पहुंचने के लिए कल्लकल्लर की बस सेवा उपयोग है |

14. संगला घाटी ( sangla himachal pradesh ):-

संगला घाटी (sangla himachal pradesh):-

 

समुद्र तल से 2680 मी. ऊंची संगला घाटी पहुंचने के लिए टापरी से बस सुविधा उपलब्ध है | रास्ता खतरों से भरा है | सफर तय कर बस करहम हम पहुंचते है | यहां मैं आगे की यात्रा फौजियों की पैनी नजरों के महफूज साये में संगला पहुँचते है |

प्रकृति की अथाह कृपा को भली-भांति अपने दामन में समए सेबों, बादामों, पिश्तों आदि के बगीचों से लदि-फदी है | सांगला घाटी के किन्नर गांव | इनके अलावा यहां चीड़, पाइन, आदि के वृक्ष भी कतार बद्  काफी भारी मात्रा में खड़े हैं | यहां के निवासी सीधे, धर्मावलम्बी व मेहमान नवाज हैं |

अपनी टांगो पर भरोसा कर चल पड़िये व 6 तल्लों  वालों किला व उसमें रखे अस्त्र-शस्त्रों को देखिए | या किला रामपुर के राजा द्वारा निर्मित है |हिमाचल प्रदेश का यह क्षेत्र कामरू कहलाता है |

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15. कल्पा ( kalpa himachal pradesh ):-

कल्पा (kalpa himachal pradesh):-

 

यह स्थल समुद्रतल से 2759 मी. की ऊंचाई पर स्थित है, जहां पर बस द्वारा 5 घंटे का सफर तय करके पहुंचा जा सकता है | यहां का प्राकृतिक दृश्य बड़ा ही मनोहारी है | यहाँ काले धने बादालों का आना-जाना कम ही होता है और यहां ठंड अधिक पड़ती है | जिला मुख्यालय भी कल्पा में ही है |

कल्पा से आगे बसें नहीं जाती है | हालांकि सड़क तिब्बत तक जाती है | एक रास्ता मनाली भी जाता है | किन्नौर भारत व तिब्बत का सीमावर्ती क्षेत्र है |

जहां से मां पार्वती वह प्रिय भगवान भोलेनाथ की निवास स्थली कैलाश दृष्टिगोचर होती है | श्वेत बर्फ से ढके कैलाश पर पड़ती सूर्य की किरणों से वह विशाल स्फटिक की भांति जगमागा उठता है | ऐसा लगता है मानो शिव का समाधि गत ओज शांति का प्रतीक श्वेत प्रकाश विश्व को शांति का प्रदान दे रहा हो |

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16. कुल्लू ( kullu himachal pradesh ):-

कुल्लू (kullu himachal pradesh):-

हिमाचल प्रदेश मेंयह स्थल समुद्रतल से 3915 भी की ऊंचाई पर स्थित है, जिसके जिक्र हिंदूओं के पवित्र ग्रंथ रामायण तथा महाभारत में भी आता है | इस देव भूमि पर मुख्यत 8 पहाड़ी नदिया बहती है |

पर्वतमाला नीचे की दीवार की तरह कुल्लू को घेरे है | सुंदर प्राकृतिक संपदा इसके सौंदर्य में चार चांद लगा देती है | सेब, नाशपाती, चेरी, खुमानी आदि की भरमार वसंत के मौसम में रहती है और गर्मियों में यहां की घटियां लाल फूलों की मखमली चादर ओढे दिखाई देती है तो खेत धान, गेहूं एवं जौ को सुनहरे रंग से सर्दियों में रंग जाते हैं |

यह प्राकृतिक बदलाव जहां मन के आनंद को दूना करता है वहां मनो प्रकृति का अटल सत्यनिष्ठ सिद्धांत भी बतलाता है कि बदलाव का नाम ही जीवन है | पूरी सृष्टि परिवर्तनशील है | हर पल कहीं-न-कहीं कुछ-न-कुछ बदल रहा है परिवर्तन हो रहा है |

ठंड से बचने के लिए पुरुष लोग सर पर कुल्लू टोपी व शरीर पर पट्टू पहनते है | महिलाएं भी स्वनिर्मित ऊनी पोशाक व चांदी के गहने पहनती है | मूल निवासियों के अलावा यहां तिब्बती लोग भी निवास करते हैं | इनमें कुछ दुकानदारी व कुछ पशुपालन कर पेट पालते हैं |

उत्सव

कुल्लू का मुख्य त्यौहार यहां का विख्यात दशहरा मेला है | मेले की विशेषता यह है कि यहां पर रावण को फूँका नहीं जाता, जलूस निकाला जाता है | देवताओं की सवारी निकाली जाती है |

लेकिन इस उत्सव में सर्वप्रथम हिडिम्बा देवी को ही लाया जाता है व मेले की समाप्ति पर सर्वप्रथम उन्हें ही ले जाया जाता है | सभी देवताओं की सवारी उन्हीं का अनुसरण करते हुए उनके पीछे-पीछे चलती है |

यहाँ टालपुर मैदान के पास रघुनाथ जी का मंदिर स्थित है, इसके पास में सुंदर झरना भी है, जो वातावरण के सौंदर्य को और भी बढ़ा देता है | यहां पर मैदान में देवताओं की पूजा-अर्चना होती है |

व उन्हें जलचर, भूचर व नभचर आदि पशु पक्षियों की बलि भी दी जाती है | लगातार दस दिन तक चलने वाले इस मेले में खरीद-फरोख्त की जाती है, गाना-बजाना व नाचने का रंगीन दौर चलता है | दूर दराज के कलाकार इसमें भाग लेने आते हैं |

कुछ दूर पर माँ वैष्णो की गुफा मंदिर जगन्नाथ जी का मंदिर है | आगे चलकर बिजली महादेव का अनोखा मंदिर है | और आगे जाने पर पशुराम मंदिर व त्रिलोकीनाथ मंदिर है | दर्शनार्थियों को इन दुलर्भ मंदिरों के दर्शन अवश्य करने चाहिये |

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17. छितकुल ( chitkul himachal pradesh ):-

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इस गांव के निवासी यहां के प्राकृतिक परिवेश अहेलादी  हो उठते हैं | यहां पर हर तरफ अनेक प्रकार के फलों के बगीचे शोभायमान होते हैं | स्वच्छन्द व मदमस्त वातावरण में उन्मुक्त होकर सरपट दौड़ लगाते कुलाचें  भरते हिरणों के झुंड, समा देखते ही बनता है | जिसे शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता है |

जितना विचित्र यहां का प्राकृतिक परिवेश है उससे कहीं ज्यादा अनोखा यहां का सामाजिक जीवन है | त्योहारों पर औरते गहनों से लदी रहती है | गाना-बजाना व नाचने का सिलसिला चलता है |

नाच के समय साथ देने वाला युगल जीवन-साथी में बदल जाता है | लड़का-लड़की मजबूरी में साथ-साथ रहने को बाध्य नहीं है | वह जब चाहे जीवन साथी बदल सकते हैं | एक स्त्री कोई पति कर सकती है |

यहां तक कि विवाह में जोर जबरदस्ती भी चलती है | यहां से आगे कुहू, पंगी रारंग आदि की यात्रा भी की जा सकती है लेकिन यह यात्राएं खतरनाक है | अत: रारंग से ही लौटना बेहतर रहेगा |

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18. मणिकरण ( manikaran himachal pradesh ):-

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समुद्र तल से 1900 मी. की ऊँचाई पर स्थित मणिकरण का सम्बन्ध भगवान शिव शंकर भगवान व माँ पार्वती से लेकर सर्वप्रथम सिक्ख गुरु गुरुनानक देव तक है | पौराणिक कथा करती है कि एक बार आदि देव शंकर व  आदि शक्ति मां पार्वती भ्रमण कर निकले |

भ्रमण के समय माँ के कान का कर्णहार गिर पडा जब यह बात भगवान शिव को पता लगी तो वह कर्णहार का पता लगाने के लिए ध्यान करने बैठ गये | प्रभु के गंभीर ध्यान से संपूर्ण ब्रह्मांड कंपायमान हो उठा |

हालात की गंभीरता को समझते हुए शेषनाग जिन्होंने नजर बचाकर वह कर्णहार उठा लिया था व पाताल भेज दिया था, हार व अन्य कई मणिमुक्ताओं सहित भगवान शिव के समक्ष उपस्थित हुये |

पाताल छोड़कर बाहर निकलने से पृथ्वी में सुराख हो गया व जलधारा बहने लगी | आशुतोष भगवान ने कर्णहार लेकर बाकी मणिमुक्ताओं को पत्थरो में परिवर्तित कर उस सुराख को बंद कर दिया |

युगांतरों के पश्चात पहले सिक्ख गुरु नानक देव भी वहां पहुँचे व पत्थरों में परिवर्तित मणि. मुक्ताओं को हटा कर उस जलधारा को फिर प्रवाहित किया | इस पवित्र जल को दोबारा प्रकट करने के उपलक्ष्य में यहां गुरुद्वारा बनाया गया जोकि शिव-पार्वती मंदिर के निकट बनाया गया है |

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19. मनाली ( manali himachal pradesh ):-

मनाली (manali himachal pradesh):-

 

कुल्लू से 40 किमी. की दूरी पर स्थित मनाली जिसका पुराना नाम मनलसु अर्थात् सम्पूर्ण मानव जाति के आदि बुजूर्ग मनु का निवास स्थल मनुआलय है | समय ने कोई करवटें ली व मनुआलय भी बदल कर मनाली हो गया |

प्राकृतिक सम्पदा से परिपूर्ण मनाली की गिनती भारत वर्ष के सबसे खूबसूरत पहाड़ी शहरों में होती है | चहुँ और गिरी कन्दराएँ चप्पे चप्पे पर बिखरी शीतल हरियाली व मानव सृष्टी के उत्तम की साक्षी बिपाशा नदी |

क्षितिज पर चाँद अपने पूर्ण यौवन पर हो, चांदनी चहुँ ओर छिटक रही हो, ऐसे में इस वृद्द यौवन बिपाशा का यौवन देखने योग्य होता है जो अपने तट पर भ्रमण करते दर्शनार्थियों को मतवाला कर देता है |

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20. हिडिम्बा का मंदिर hidimba ka mandir himachal pradesh :-

हिडिम्बा का मंदिर hidimba ka mandir himachal pradesh:-

यहीं पर पांडवों ने जुए में अपना सब कुछ हारकर 14 वर्ष तक बनवास काटे थे | वनवास के दौरान एक रात जंगल में काम से निकालें भीमसेन का आमना-सामना राक्षसी हिडिम्बा से हुआ और दोनों भी विवाह के पवित्र बंधन में बंध गये |

मनाली में यह हिडिम्बा राक्षसी देवी के रूप में पुर्जित है | देवी हिडिम्बा का काठ का मंदिर भी विपाशा नदी के किनारे स्थित है | इस अनेक मूर्तियों से सुसज्जित दरवाजे वाले मंदिर में देवी के चरणों की भी छाप है | यह अनोखा मंदिर 1553 ई. में महाराजा बहादुर सिंह ने बनवाया था |

निकट ही त्रिलोकीनाथ का मनमोहन मंदिर है | यह खूबसूरत मंदिर भी हिडिम्बा मंदिर का निर्माण करने वाले टूटे कारीगर ने ही बनाया था | यह बेजोड़ कलाकार जन्म से ही टूटा नहीं था |

हिडिम्बा मंदिर के निर्माण के पश्चात उसका सीधा हाथ इस डर से काट डाला गया कि कहीं वो किसी और खूबसूरत मंदिर का निर्माण न कर सके लेकिन त्रिलोकीनाथ का मंदिर उस कलाकार ने अपने दूसरे हाथ से ही बनाया व उसकी खूबसूरती हिडिम्बा मंदिर से बढ़कर मानी गई | बाद में उसे मौत की आगोश में सुला दिया गया |

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21. वशिष्ठ आश्रम ( vridh ashram himachal ):

वशिष्ठ आश्रम (vridh ashram himachal):

यह आश्रम मनाली से मात्र 3 कीमी. की दूरी पर बिपाशा नदी के दूसरे किनारे पर स्थित है | इस नदी का यह नाम गुरु वशिष्ट द्वारा ही दिया गया था | वह गुरु वशिष्टजी की तपोभूमि है | निकट ही गर्म पानी का कुंड है |

हिमाचल प्रदेश तक कैसे जाये |

हवाई अड्डा :Plan your tour

Shimla Airport

Dharamsala airport

ट्रेन :

Una Railway Station

Palampur Railway Station

रोड द्वारा :

अहमदाबाद से हिमाचल प्रदेश [21 h 29 min (1,294.8 km) via NH48]

उदयपुर से हिमाचल प्रदेश [16 h 33 min (1,011.6 km) via NH58 और NH48]Bus Booking

जयपुर से हिमाचल प्रदेश [10 h 58 min (622.3 km) via NH48]

गोवा से हिमाचल प्रदेश [38 h (2,221.9 km) via चित्तोर्गढ़ – खर्गोने – भुसावल हाईवे]

मुंबई से हिमाचल प्रदेश [29 h (1,771.6 km) via  48/NH48]

इंदोर से हिमाचल प्रदेश [7 h 40 min (289.5 km) via Bela – Behrampur Rd]

दिल्ही से हिमाचल प्रदेश [7 h 20 min (342.8 km) via NH44]

 

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