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How to control mind | मन को नियंत्रण मे रखने का उपाय

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How to control mind

Hello दोस्तों आज में आपको आपके मन को कैसे कंट्रोल करे ( how to control mind in hindi ) के बारेमे थोड़ी कुछ जानकारी प्रदान करुगा | आपका मन चनचल होता कभी आप कर रहे कुछ और होते हो और मन कही और होता है | इसलिय में आपको मनको control करने के बारेमे थोड़ी कुछ जानकारी बताऊंगा |

मन को काबू में कैसे रखे

गीता में भगवान श्री कृष्ण ने मन को नियँत्रित करने के बारे में बताया है | इस ग्रंथ में मन, शरीर और आत्मा के बिच अंतर दिखाया है | जिसमे मानव शरीर की तुलना रथ से की गयी है और रथ के घोड़ो को हमारे शरीर के विभिन्न अंग बताया गया है जैसे आँख, नाक, कान, जीभ, अनचाहे विचार | सारथी को मन बताया गया है और आत्मा को रथ का स्वामी माना गया है | यह तभी तक संभव है जब तक की मन को काबू में ना कर लिया जाए |



अनियंत्रित मन इन्द्रियों को सांसारिक सुखो की ओर ले जाता है, मन सांसारिक सुखो की ओर आकर्षित होता रहता है,  लेकिन जब मन को नियँत्रित कर लिया जाता है, तब यह आपको सही दिशा की ओर ले जाता है जहाँ आप जाना चाहते है. ऐसे में आप जीवन में सफलता और संतोष भी प्राप्त कर सकते है |

How to control mind | मन को नियंत्रण मे रखने का उपाय

क्या हम हमारे मन को नियँत्रित कर सकते है | इसका जवाब है हाँ, मन बहती हवा की तरह होता है जिसे नियँत्रित करना कठिन होता है लेकिन असंभव नहीं, अगर हम चाहे तो अपने मन और विचारो को नियंत्रित कर सकते है |

मन को नियँत्रित करने के लिए दो हथियारों का सहारा लेना पढ़ता है. पहला हथियार अभ्यास का है और दूसरा हथियार वैराग्य का है. अभ्यास का मतलब है सतत या निरंतर अभ्यास. इसके अंतर्गत मन को किसी एक चीज पर फोकस करो, वह वहाँ से भागेगा, मन पर विजय प्राप्त करने की कोशिश करो, वो फिर भागेगा, उसे फिर पकड़ो, ऐसा आपको बार बार करना होगा |

 



 

एक बार जब मन सीधे रास्ते पर आ जाये तो वह फिर उसी रास्ते पर ना चला जाये इसलिए हमें दूसरे हथियार वैराग्य की जरूरत पढ़ती है | क्योकि आपकी मंजिल के दौरान आपका मन उन्ही सांसारिक सुखो के प्रति आकर्षित होता रहेगा | अत: इसे सदा के लिए नियँत्रित करने के लिए दूसरे हथियार वैराग्य का सहारा लेना होगा | वैराग्य की प्राप्ति ज्ञान के द्वारा संभव है |

मन को यह समझाना होगा की सारे सांसारिक सुख झूठे है | जब मन यह समझ जायेगा तो मन बुराई की ओर झुकेगा नहीं | इससे मन अनुशासन विकसित करेगा और ये अनुशासन आत्म नियंत्रण को विकसित करेगा | जब मन बुराइयों से छुटकारा प्राप्त कर लेता है और सांसारिक सुखो पर विजय प्राप्त कर लेता है, तब उसका ध्यान उसके लक्ष्यों पर केन्द्रित हो जाता है और वह सांसारिक सुखो और ऐसे विचारो जो उनके लक्ष्य में बाधा बने उनसे घृणा करने लगता है |

महाभारत ( How to control mind )

“महाभारत के युद्ध के दौरान जब अर्जुन ने युद्ध लड़ने से मना कर दिया तब श्री कृष्ण अर्जुन को समझाते हुए कहते हैं कि हे अर्जुन तुम किसलिए डरते हो ? तुम स्वयं परमात्मा का एक अंश हो। अपने भीतर झांक कर अपनी आत्मा को देखो फिर तुम्हें आत्मा में उस परमात्मा का रूप दिखाई पड़ेगा।

अर्जुन कहते हैं कि हे प्रभु आप तो कहते हैं कि इस शरीर में आत्मा का वास है और अब आप कह रहे हैं कि आत्मा को देखो? आखिर इस आत्मा को देखेगा कौन? क्या कोई और भी शक्ति है इस शरीर में जो आत्मा देखेगी ? श्री कृष्णा हाँ, मन ! ये मन बहुत शक्तिशाली है। अर्जुन मन के बारे में विस्तार से समझाने के लिए मैं तुमको एक कथा सुनाता हूँ |

सोचो कि शरीर एक रथ है। इस रथ में पाँच घोड़े हैं जो रथ को चलाते हैं ये पांच घोड़े ही हमारी पांच इंद्रियां हैं। इस रथ का सारथी है और इस सारथी के हाथ में ही पांचों घोड़ों की लगाम हैये जिधर चाहे उधर इन घोड़ो को ले जा सकता है। इस रथ का स्वामी एक राजा है जो रथ के सिंघासन पर बैठा रहता है। ये राजा ही हमारी आत्मा है जो इस पूरे रथ रूपी शरीर का मालिक है |”

reference site : http://www.hindisoch.com

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