केरल में देखने लायक पर्यटन स्थल

केरल में देखने लायक पर्यटन स्थल

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केरल जब भारत स्वतंत्र हुआ, तो दो विभिन्न रियासतों, त्रावणकोर और कोचीन को 1 जुलाई 1949 ई. को मिलाकर त्रावणकोर कोचीन राज्य बनाया गया | लेकिन मालाबर, चेन्नई प्रान्त का हिस्सा बना रहा | राज्यों के पुनर्गठन की योजना के अन्तर्गत त्रावणकोर कोचिन राज्य और मलाबार को मिलाकर 1 नवंबर, 1956 ई. को केरल राज्य बनाया गया |

केरल के पश्चिम में अरब सागर, उत्तर पूर्व में कर्नाटक, पूर्व में तमिलनाडु और दक्षिण में हिंद महासागर है | इसका समुद्र तट 590 किमी. लंबा है | राज्य में पश्चिम की ओर बहने वाली अनेक छोटी बड़ी नदियों है | पूर्व की दिशा में तीन नदिया बहती है |
 


 

राज्य के 74 प्रतिशत क्षेत्र में खेती होती है साथ ही यहां पर 50 प्रतिशत लोग कृषि पर निर्भर है | कुल कृषि क्षेत्र की करीब 15 प्रतिशत भूमि पर सिंचाइ की सुविधाएं उपलब्ध है | केरल नारियल, रबउद्ध सुपारी, इलायची, गन्ना, काजू, चाय, अदरक आदि फसलों का मुख्य उत्पादक राज्य है, खाधान्न में चावल तथा टोपियोंका यहां की मुख्य फसलें में काली मिर्च प्रमुख है | वन संपदा की द्रुष्टि से केरल बहुत समुद्र राज्य है | यहां चिरहरित वन है | सागौन, ब्लैकवुड, आबनूस, साफ्टवुड और शीशम की लकड़ीयां वनों से प्राप्त होती है |

‘ओणम’ केरल का विशिष्ट पर्व है | यहाँ त्यौहार फसल कटाई के मौसम में बनाया जाता है | ओणम पर्व राजा महाबली की वापसी की खुशी में मनाया जाता है | अन्य त्योहारों में विशु, नवरात्रि महाशिवरात्रि, बल्लमकली (नौका दौड़), पूरम् आदि उल्लेखनीय है | पाम्बा नदी के तट पर हर वर्ष ‘मरामोन सम्मेलन’ होता है, जो एशिया में ईसाईयों का सबसे बड़ा आयोजन है |

केरल में देखने लायक पर्यटन स्थल

1.त्रिवेन्द्रम(trivandrum padmanabhaswamy kerala)

त्रिवेन्द्रम(trivandrum padmanabhaswamy kerala)

यह शहर प्राकृतिक सौन्दर्य की अनोखी छटा के बीच अवस्थित है | यहां पर पुराने तथा नये वस्तु में परस्पर विरोधाभाष स्पष्ट है | एक ओर आधुनिकता की भाग दौड़ है तो दूसरी ओर विष्णु व श्री पदमस्वामी के मंदिरों की चकाचौंध से भरी तनावपूर्ण जीवन शैली के विपरीत धीमा, शांत व मनोहारी आचरण अवश्य ही केरल निवासियों को नवजीवन व स्फूर्ति प्रदान कर नई सुबह के साथ फिर भाग दौड़ करने की शक्ति प्रदान करता है | मंदिर में श्री पदमनाम स्वामी की अधलेटी प्रतिमा पर अनन्त फनों से नागराज छाया किये हुये है | भगवान श्री पदमनाम स्वामी के श्री चरणों की और माता लक्ष्मी बैटी है |

2.बॉट निकल गार्डन(botanikal garden kerala)

बॉट निकल गार्डन(botanikal garden kerala)

एक साथ कई चिड़ियाघरों को समेटे यह एशिया का विशिष्ट चिड़ियाघर है | बॉट निकल गार्डन में खूब सूरत बगीचा देखने लायक जगह है | और बॉट निकल गार्डन 22 हेक्टेयर विस्तार में फेला हुवा है | प्रकृति प्रेमियों के लिये गार्डन बहुत लोकप्रिय माना जाता है |

3.डच महल(dacha mahal kerala)

17वीं शताब्दी में डचों द्वारा इसे सजा धजाकर कोचिन के राजा को उपहार स्वरुप पेश किया गया था, इसलिए इसका नाम डच महल पड़ा, भित्तिचित्रों पर रामायण व महाभारत कालीन विभिन्न न कहानियों को कुशलता के साथ चित्रित किया गया है |

4.चित्रालयम(chitralaya kerala)

चित्रालयम(chitralaya kerala)

इस चित्रालय में बेशकीमती चित्रों का संग्रह है, रवि वर्मा और माइकिल रोरिक की कलाकृतियों दर्शनार्थियों को परम आनंद प्रदान करती है |

5.म्यूजियम(Museum Kerala)

म्यूजियम(Museum Kerala)

हस्तशिल्प, कांस्य मूर्तियां साज, पोशाकों के लिए विख्यात है यह नेपियर म्यूजियम है |

6.कौड़िया महल(kaudiya mahal kerala)

बाकमाल स्थापत्य शैली का अद्रितीय नमुना है यह महान | इसे देखने के लिये निजी सचिव से अनुमति लेनी आवश्यक है |

7.कोचिंग(kochi kerala)

कोचिंग(kochi kerala)

यह नगर धार्मिक समन्वयता की एक अनुपम मिसाल है, यहां पर सभी धर्म के लोग पारस्परिक प्रेम के साथ रहते हैं | भारत के इस प्राचीनतम शहर में यहूदी उपासनागृहों, मस्जिदों, हिन्दू मंदिरों में गूंजती धार्मिक ध्वनियों मन को मोह लेती है | ऐतिहासिक काल से ही यह एक व्यापारिक क्षेत्र रहा है | यहां का सारा व्यापार बंदरगाहों पर आश्रीत है |

8.यहूदी मंदिर जूस सिनागाग(yahudi mandir keral)

यहूदी मंदिर जूस सिनागाग(yahudi mandir keral)

1568 ई. में निर्मित हुआ फिर 1662 में डचों द्वारा इसका फिर से जीणोद्वार हुआ | आज भी यह ध्वस्तप्राय ही है | अतीत के स्मृति चिन्ह के रूप में इसे देखा जा सकता है |

9.बल्लारपदम(vallarpadam kerala)

बल्लारपदम(vallarpadam kerala)

यह द्रीप सैंटी मैरी चर्च के लिए जाना जाता है | निकट ही भगवती मंदिर, महान, गिर्जा आदि भी  दर्शनीय है |

रेलमार्ग, बसमार्ग, व जलमार्ग, से भी कोचिंग आया-जाया जा सकता है |

10.सैंट फ्रांसिस चर्च(saint francis church kerala)

सैंट फ्रांसिस चर्च(saint francis church kerala)

कैथोलिक चर्च पुर्तगालियों द्वारा 1510 में निर्मित हुआ इसके देखकर इतिहासिक पुर्तगाली धर्म निष्ठा का अंदाजा लगाया जा सकता है |

11.वन्यजीव पेरियार अभयारण्य(vanya jeev periyar abhyaran kerala)

वन्यजीव पेरियार अभयारण्य(vanya jeev periyar abhyaran kerala)

जलचर, भूचर व खेचर जीवों की यह शरणस्थली पेशियर  झील के तट पर अपना एकत्र राज्य फैलाए हुये पुराने नाम नेमियामपार पर सैंक्चुअरी, वर्तमान नम पेशियर  वाइल्ड लाइफ, घने हरे भरे वन में जीवों को नजदीक से उनके प्राकृतिक परिवेश में निहारने व जानने के लिए झील पार करनी पड़ती है जिसके लिये लांच, नाव आदि का यहां प्रबंध है | यूं तो यहां की यात्रा कभी भी की जा सकती है | लेकिन गर्मी के मौसम में अभयारण्य भ्रमण का मजा कुछ और है क्योंकि सारा अभयारण्य झील के साथ स्थित है तो प्यास बुझाने व झील के पानी में तैरकर गर्मी से छुटकारा पाने के लिये वन्यजीव बाहर रहते हैं और उनका दर्शन आसानी से हो जाता है |

चीता, बाघ, हिरण, सूअर, बनैले भैंसे, गवल आदि का दर्शन यहां उनके स्वछन्द रूप से भ्रमण करते हुये मिल जाता है | इसलिये सावधानी भी आवश्यक है | जाने-अनजाने पक्षियों के रंग-बिरंगे झुण्डों का दर्शन पानी के किनारे होता है |

12.क्रांगानेर(cranganore kerala)

क्रांगानेर(cranganore kerala)

इसका प्रारंभिक नाम मसीरिया था, जोकि बाद में बदलकर क्रांगानेर हो गया | शुरू से ही व्यापारिक स्थल  होने के कारण यहां कई विदेशी ताकतों ने अपना उपनिवेश स्थापित किया था | फिर राजा चेरामन कि यहां राजधानी थी | अन्य मंदिरों के मुकाबले थिरुवनचिकुलम व देवी का मंदिर विशेष दर्शनीय है | उपनिवेश भूमि रहने के कारण विदेश धार्मिक स्मृति चिन्ह भी यहां देखे जा सकते हैं, जिसमें पुर्तगालियों का किला, मुहम्मद हजरत के अनुयायियों द्वारा स्थापित मस्जिद मुख्य हैं | साथ यह स्थल प्राकृतिक सम्पदा से मालामाल भी है जो दर्शनार्थियों के मन को मोह लेता है |

13.कोम्मी कोड या कालीकट(calicut kerala)

कोम्मी कोड या कालीकट(calicut kerala)

इसका प्रारंभिक नाम काली कर था, जोकि बाद में बदलकर कोम्मी कोड अथवा कालीकट हो गया | यहां पर 20 मई, 1498 को वास्कोडिगामा का आगमन हुआ था हुआ तथा सन् 1515 में जमोरिन राजाओं से समझौते के पश्यात् यहां पर पुर्तगालियों ने कारखाना स्थापित किया था | फिर एक समझौते 1792 ई. में हुआ | टीपू सुल्तान के साथ, परिणाम स्वरुप कोम्मीकोड यानी कालीकट पर ब्रिटिश का कब्जा हो गया
| यहां कई दर्शनीय प्राचीन मंदिर, गिर्जा व मस्जिद है |

 

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