राजस्थान में देखने लायक पर्यटन स्थल

राजस्थान में देखने लायक पर्यटन स्थल

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  • जैसलमेर (jaisalmer) :
  • जोधपुर (jodhpur)
  • माउंट आबू (mount abu)
  • उदयपुर (udaipur)
  • नाथ द्रारा (nathdwara)
  • एकलिंगजी (eklingji)
  • हल्दीघाटी (haldighati)
  • चित्तौड़गढ़ (chittodgad)
  • सरिस्का (sariska)
  • भरतपुर (bharatpur)
  • Jaipur
  • पुष्कर तीर्थ (pushkartirthrajasthan)
  • कोटा (kotarajasthan)
  • अजमेर (ajmer)

Rajasthan  Paryatan Sthal in hindi

राजा महाराजाओं की भूमि राजस्थान पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थान रखता है | यह भारत का मरुस्थलीय राज्य है | क्षेत्रफल की दृष्टि से यह भारत का सातवां राज्य है |इस मरुस्थलीय राज्य में जोधपुर,  बीकानेर,  जैसलमेर जैसे कई ऐतिहासिक शहर है, जहां अभी भी पुराने किले महान एवं अन्य इमारत है |

राजस्थान का राजमहल प्राचीन भारतीय भवन निर्माण कला को स्पष्ट रूप से दर्शाता है | पुरुषों की वेशभूषा, रंगीन पगड़ी तथा बड़ी बड़ी मूछें उनकी वीरता की पहचान है |स्त्रियों के चमकीले रंगीन का आगरे भी उनकी अलग ही पहचान है | उनके सर से पैर तक पहने वाले राजस्थानी के  जेवर अनोखी पहचान रखते हैं |  इसलिए राजस्थान में जाने वाले पर्यटन यह सब खरीदते हैं |



राजस्थान में देखने लायक स्थान

1. जैसलमेर (jaisalmer rajasthan) :

जैसलमेर (jaisalmer rajasthan)

राजस्थान का यह  रावल जैसल शहर की स्थापना 1156 ई में की थी |इन्हीं के नाम परिसर का नाम जैसलमेर पड़ा यह स्वर्णिम आभायुक्त रेगिस्तानी शहर है |

अतीत में जैसलमेर मध्यपूर्व भारत का आयात निर्यात का प्रमुख केंद्र था | यह आयात निर्यात का सारा सामान रेगिस्तानी जहाज यानी जालीदार पाओ वाले ऊंट के सहारे ही लाया ले जाया जाता था |

निकट ही स्थित लोधुबा का माया महल, सर्व मनोकामना पूर्ण करने वाले कल्पतरु वृक्ष युक्त जैन मंदिर 30 25 वर्ग किमी के विस्तृत क्षेत्र में फैला रेतीला नेशनल पार्क, जहां चिकारा, सियार व कई तरह के पक्षी दर्शनीय है |


Camel rides desert

तीव्र गर्मी से बचते हुए इस पर्यटन स्थल का दर्शन करने का सही समय अक्टूबर से मार्च तक का है |

जैसलमेर की मशहूर स्टोन कार्मिक देखने के इच्छुक पर्यटक को को नक्काशी से परिपूर्ण अतीत की धरोहर पटवा हवेली, राजा का महल, नथमल जी की हवेली आदि बरबसआकृष्ट करते हैं |

1156 ई  राव जैसल सी द्वारा निर्मित जैसलमेर दुर्ग,  12 वीं शताब्दी में निर्मित आदिनाथ मंदिर, 1722 में निर्मित जवाहर विलास महल, 1813 ई में महाराजा  मूलराज द्वारा निर्मित मोती महल  व बारीसाल द्वारा निर्मित बाद निवास यहां स्थित अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल है |

इतना ही नहीं जैसलमेर की हस्तशिल्प आभूषण कांच जड़ाऊ वस्तु अभी कम मनमोहक व आकर्षक है | जैसलमेर में ठहरने के इच्छुक पर्यटन होटल नीरज, राम गेस्ट हाउस,  होटल रेणुका, होटल परदेशी, होटल ताज पैलेस, होटल राजधानी आदि होटलों में  ठहर सकते हैं | रेल एवं राज्य परिवहन की बसों से जैसलमेर तक पहुंचा जा सकता है |



2. जोधपुर (jodhpur rajasthan)

जोधपुर (jodhpur rajasthan)

कन्नौज के राजा जयचंद के वंशज रावत जो दानिश नगर की नीव डाली थी | 1212 इ मे राजा सिंह अपने कुछ सरदारों के साथ मारवाड़ में आकर बस गया था |

मारवाड़ के राठौड़ वंश की शुरुआत राव सिंह से मानी जाती है |  1395 ई मैं राव चुडा ने अपने विवाह पर मंदोर दुर्ग दहेज स्वरूप पाया और इसे अपनी राजधानी बनाया |

राव चुडा की मृत्यु के पश्चात राव जोधा को मंडोर दुर्ग सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं लगा | इसलिए अपने राज्य की संपूर्ण शक्ति को संगठित करने के विचार से उन्होंने मंदौर दुर्ग से 9 किमी दूर एक नए दुर्ग की न्यू डाली और अपने नाम पर जोधपुर शहर बसाया |

राव जोधा ने ही शहर के चारों ओर 10 किमी लंबी दीवार का भी निर्माण करवाया | इस नगर में विभिन्न दिशाओं से प्रवेश द्वार हेतु आठ द्वार है | जोधपुर एक ऐतिहासिक नगर है |  और यहां कई ऐतिहासिक इमारतें स्थित है |

जलाशय

1459  ई  मैं राव जोधा द्वारा स्थापित या शहर एक समुद्र शहर है |  जोधपुर की ख्याति जलाशय वह दुर्गो के लिए है साथ ही गुलाब सागर के तट पर स्थित हाथी महल,  राज प्रसाद, गंगा श्याम मंदिर,  83 खंभों पर स्थित नाथ संप्रदाय का मंदिर, उमेद भवन आदि भी दर्शनीय है |

निकट ही स्थित 1459 इ मे  निर्मित अजय, मेहरानगढ़ दुर्ग, इसके चारों ओर ऊंची ऊंची दीवारों ने इसे सदा ही अजय सुरक्षित बनाया रखा है |

कट्टर मुसलमान शासक औरंगजेब ने 1678 ई  मैं ईस राज्य का पुनर्निर्माण हुआ | आज वर्तमान समय में यह विशाल किला मात्रा एक ऐतिहासिक किताब मात्र है  ब्लू पटेरिया किले में म्यूजियम खुल गया है जो यहां आने वालों का परिचय आपने गौरवशाली इतिहास से करवाता है |

उत्तर पूर्व में  जयपोल, गुंबद वाला, सेना टेप वंदना, पश्चिम में फतह पोल, राजा मानसी की 15 रानियों के हाथों के निशान, मोतीमहल, 80 किलो सोने से सदा  राजा फूल महल आदि दर्शनीय है |

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3. माउंट आबू (mount abu rajasthan)

यह राजस्थान का प्रमुख हिल स्टेशन है यह हिंदू व जैनियों का प्रमुख तीर्थ स्थल है यह जैन धर्म के पांच पवित्र स्थानों में से एक है प्राचीन काल में इसका नाम  अबुर्दाचल था |

जो अब संक्षिप्त रूप में माउंट आबू के नाम से जाना जाता है | किवदंती अनुसार श्री कृष्ण द्वारका जाते समय स्थल पर रुके थे यहां के देलवाड़ा जैन मंदिर पर्यटन आकर्षण का केंद्र है |

इस स्थान पर पांच मंदिरों का निर्माण किया गया है | इन मंदिरों की दीवारों स्तंभों एवं छात्रों पर इतना बारीक काम किया गया है, कि पर्यटकों की आंखों आश्चर्य से खुली की खुली रह जाती है माउंट आबू के सर्वोच्च शिखर को गुरु शिखर कहा जाता है |

यहां एक गुफा में स्थित दत्तात्रेय मंदिर दर्शनीय है | स्वास्थ्यवर्धक आवाज से परिपूर्ण यह पहाड़ी क्षेत्र जैन मंदिरों का गढ है मंदिरों की बनावट एवं सजावट अदभुत है |

आदिनाथ, महावीर, नेमिनाथ, पाश्र्वनाथ एवं ऋषभ देव कार्य मंदिर दूधिया पत्थर से निर्मित है | विमल बरसा ही में आदिनाथ तेजपाल में नेमिनाथ वरुण शॉप में 200 मन की पांच तत्वों से निर्मित बहुमूल्य मूर्ति अद्वितीय है |

निकट ही गुरु शिखर पर सृष्टि की उत्पत्ति करता ब्रह्मा, पालनकर्ता विष्णु एवं संहार करता शिव का त्रिमूर्ति मंदिर है | अचलगढ़ अधरादेवी सन सेट पॉइंट आदि भी दर्शनीय है |
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4. उदयपुर (udaipur rajasthan)

महाराणा उदय सिंह द्वारा 1569 ई. इस शहर की स्थापना की गई थी | शहर में चार मुख्य दरवाजे सूरज ब्रह्म, हाथी कृष्ण हैं | चारों तरफ हरियाली से भरपूर पर्वतमालों से घिरा हुवा उदयपुर एक सुरम्य नगर है, जिसे प्रकृति ने पूर्ण सुंदरता से नवाजा है |

झीलों, उधनों, फूलो, प्राचीरों, दुर्गा आदि के अतिरिक्त अप्रतिम प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण इस नगर को ‘पूर्व का वेनिस’ और राजस्थान का कश्मीर’ कहा जाना कोई अतिश्योक्ति न होगी |

यह राणा सांगा, महाराणा प्रताप, मीरा, पन्ना धाय की धरती है | इसलिए इतिहासकारों का यह कहना कि यदि भारतीय इतिहास में मेवाड को हटा दिया जाए तो भारतीय इतिहास का महत्वपूर्ण भाग निकल जाएगा |

यह शहर अरावली पहाड़ों से घिरा हुआ है | इस शहर के बारे में इतिहासकारों का कहना है कि महाराजा उदयसिंह मुगल हमलो से बचने के लिए इस शहर की स्थापना की थी |

उदयपुर में अनेक दर्शनीय स्थल है जिसमें पिछौला झील, लेक पैलेस, 1651 ई. में महाराजा जगत सिंह द्वारा निर्मित जगदीश मंदिर, दूधतलाई पार्क, लगभग 100 एकड़ के क्षेत्रफल में फैला गुलाब बाग, नगर से उत्तर पश्चिम में 5 किमी की दूरी पर स्थित फतेह सागर झील, महाराणा प्रताप स्मारक व उदयपुर से 8 किमी. की दूरी पर स्थित शिल्प ग्राम पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है |

दर्शनार्थियों को मानसून पैलेस, लक्ष्मी विलास, सिटी पैलेस, मुनिवास व यहां की झील, भाग इत्यादि विशेष रूप से आकर्षित करते हैं |

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5. नाथ द्रारा (nathdwara rajasthan)

नाथ द्रारा:- (nathdwara rajasthan)

बनास नदी के तट पर बसा यह तीर्थ उदयपुर से 48 किमी. की दूरी पर स्थित है | सृष्टि के पालन कर्ता भगवान विष्णु के 10 अवतारों में दूसरे नंबर के 16 कला सम्पन्न शमल रंग, नटखट व गंभीर स्वभाव वाले भगवान श्री कृष्णा यहां श्रीनाथजी के रूप में पूर्जित है | यह काले पत्थर की भव्य प्रतिमा 1669 ई. में प्रतिष्ठित हुई | मंदिर में केवल हिंदुओं को प्रवेश करने का अधिकार प्राप्त है |

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6. एकलिंगजी (eklingji rajasthan)

एकलिंगजी:- (eklingji rajasthan)

आशुतोष भगवान शंकर के इस मंदिर में चार मुखवाले एकलिंगजी होकर प्रतिष्ठित है | दूधिया पत्थर के निर्मित यह मंदिर 734 ई. में निर्मित हुआ | भगवान शिव की अर्धागनी मां पार्वती उन्हीं का दुष्ट दलनकर्ता रूप काली माता का भी यहाँ मंदिर है |

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7. हल्दीघाटी (haldighati rajasthan)





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इस युद्ध क्षेत्र का राजस्थान के राजपूतों से गहरा संबंध है | यह वो इतिहासिक युद्ध भूमि है जहां राजपूतों की आन बान शान महाराणा प्रताप ने शक्तिशाली मुगल बादशाह अकबर के दांत खट्टे कर दिए थे | हालांकि इस युद्ध में महाराणा प्रताप पराजय का मुंह देखना पड़ा था |

लेकिन इस युद्ध में महाराणा प्रताप के शक्तिशाली घोड़े चेतक को योगदान कुछ कम नहीं | विशाल सेना से लोहा लेते जब राणाप्रताप बूरी तरह लहू लुहान हो गये तो चेतक घायल सवार को लेकर सरपट दौड़ता हुआ अपनी जान की परवाह किये बिना ही खाई को लोध गया व सवार के प्राणों की रक्षा की | यह इतिहासिक यवुद्ध 1576 में 21जून को लड़ा गया |

 

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 8. चित्तौड़गढ़ (chittodgad rajasthan)

चित्तौड़गढ़ :- (chittodgad rajasthan)

यह भी राजस्थान राज्य का प्रमुख पर्यटन स्थल है, प्राचीन समय में यह नगर  चीरंगा नामक राज्य की राजधानी हुआ करता था | चित्र्कोट किसका प्राचीन नाम है | इतिहास के लंबे कालचक्र में इस ऐतिहासिक नगर पर मौर्य,  प्रतिहार,  सोलंकी तत्पश्चात सिसोदिया वंश का अधिपत्य रहा है |

चित्तौड़गढ़ वही वीरभूमि है जिसने संपूर्ण भारतीय समाज के सम्मुख शौर्य, वीरता, देश भक्ति एवं बलिदान का ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया है जो कि अतुल्यनिय है | इस वीर भूमि का कण-कण राजपूतों की वीरता एवं भामाशाह जैसे दानवीर की यशोगाथा का गुणगान करता है |

70 वीं शताब्दी में 250 मीटर ऊंचे पहाड़ पर 700 एकड़ मैं यह विशाल एवं ऐतिहासिक किला मौर्य राजपूतों ने बनवाया था | कालांतर में यह  भव्य किला बप्पा रावल के कब्जे में आ गया था |  उदयपुर के मेवाड़ की राजधानी बनने तक लगभग आठ शताब्दियों तक या मेवाड़ कर राजधानी रहा है इसी कारण यहां कोई ऐतिहासिक इमारतों का निर्माण हुआ

महाराणा कुंभा की महमूद शाह पर विजय की यादगार स्वरूप 1448 इ मे निर्मित विजयस्तंभ,  14 शताब्दी में निर्मित जैन कीर्ति स्तंभ, 11 वीं शताब्दी में महाराजा द्वारा निर्मित  समिध्वेस्वर  मंदिर,  11 वीं शताब्दी में निर्मित सतबिस देवरा, जिसमें 24 जैन तीर्थो की प्रतिमाएं स्थापित है तथा श्याम मंदिर भवन निर्माण कला के अनोखे उदाहरण है |

 

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 9. कोटा (kota rajasthan)

कोटा :- (kota rajasthan)




1264 में कोटा शहर की स्थापना हुई, चंबल नदी के किनारे बसे कोटा शहर में पुराना किला, राम माघो म्यूजियम, सरकारी म्यूजियम, कोटाबाग आदि दर्शनीय स्थल है | आवागमन एवं ठाणे के साधन उपलब्ध है |

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10. अजमेर (ajmer rajasthan)

अजमेर (ajmer rajasthan)

सातवीं शताब्दी में तत्कालीन अजय पाल चौहान ने अजमेर शहर को बसाया, लेकिन सत्ताधारी शासक समय-समय पर बदलते रहेंगे |  1193 ई मोहम्मद  गोरी, 1659 में औरंगजेब, तत्पश्चात सिंधिया राजाओ एवं फिर ब्रिटिश शासकों का इस क्षेत्र पर आधिपत्य रहा है |

अजमेर में दर्शनार्थियों के लिए काफी कुछ है | ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह, इस दरगाह पर प्रतिवर्ष रमजान के महीने में उर्स उत्सव मनाया जाता है | दरगाह की विशेषता सिद्धू फकीर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार है, जो सच्चे मन से दुआ करने पर मन की मुराद पूरी करते हैं एवं श्रद्धालुओं की भारी भीड़ प्रसाद रूप वितरित करने के लिए बनाई जाने वाली बिरयानी को बनाने में इस्तेमाल किए जाने वाले दो पात्र जिसमें एक बारी में 120 और 80 मंन चावल पकता है |

सुल्तान मोहब्बत खेल जी के पीता की समाधि जुम्मा मस्जिद, डाई दिन का झोपड़ा, तारागढ़ पहाड़ , म्यूज़ियम, लाल पत्थर का जैन मंदिर, और पृथ्वीराज चौहान द्वारा निर्मित कृत्रिम झील आदि पर्यटकों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र बना रहा है |

 

11. पुष्कर तीर्थ (pushkar tirth rajasthan)

पुष्कर तीर्थ (pushkar tirth rajasthan)

यह राजस्थान राज्य का प्रमुख हिंदू तीर्थ स्थल है | संपूर्ण भारतवर्ष में सिर्फ पुष्कर ही वह श्रद्धा स्थल है | जहां जगत के उत्पत्ति करता ब्रह्माजी पुराणिक इंदु  ग्रंथ की एक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी स्वयं अपनी ही पत्नी सावित्री से शापित है जिस कारण उनका पूजन नहीं किया जाता है |

पुष्कर में कई घाट है, जिसमें 15 घाटों का विशेष उल्लेख है | घाटों काजल मोक्ष,  पापभक्ति की शक्ति से संपन्न है | स्नान करने वाले को यह दोनों ही फल प्राप्त होते हैं |

इतना ही नहीं स्नान वाले श्रद्धालुओं वक्त चारों धामों की यात्रा एवं स्नान का फल मात्र पुष्कर के कांटो में स्थान कर कर प्राप्त करता है | दूधिया पत्थर से निर्मित मंदिर में स्थूलकाय लाल रंग एवं चार मुखी ब्रह्म देव की प्रतिमा है | उल्टे हाथ की तरह गायत्री देवी विराजमान है और नारद गणपति, पंचदेव यहां प्रतिष्ठित है |

मां सावित्री का मंदिर झील के पार सावित्री पाठ पर स्थित है | इसकी विशेषता यह है कि यहां केवल स्त्रिया ही पूजा कर सकती है | इस के निकट ही मां संतोषी और एक पहाड़ की चोटी पर गायत्री मंदिर स्थित है | विभिन्न स्थलों से रेल गाड़ियां और बस यहां आती है |

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12. जयपुर (jaipur rajasthan)

जयपुर (jaipur rajasthan)



जयपुर जिस स्थान पर आज ही या शहर स्थित है वहां पहले सूखी झील का मैदान था | यह मैदानी भाग तीन दिशाओं में अरावली पर्वत श्रृंखला द्वारा गिरा हुआ था |

राजस्थान रमन हेतु आए पर्यटकों में जयपुर का विशेष आकर्षण रहा है | 18 नवंबर सन 1727 में सवाई राजा जयसिंह ने इस शहर को बसाया था | उन्हीं के नाम पर शहर का नाम जयपुर पड़ा है |

महाराजा  जयसिंह के राजदरबार में एक बांग्लाभाषी वास्तुकार द्वारा इस नगर की सुनियोजित रूपरेखा तैयार की गई और उसी आधार पर इस नगर को बसाया गया |  1876 में  प्रिंस ऑफ वेल्स के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग का कर दिया गया था, तब से आज तक जयपुर अपने गुलाबी योवन को संभाले हुए हैं |

जयपुर में पर्यटक हो के लिए काफी कुछ देखने के लायक है |  जयपुर के आसपास कई किले हैं जिनका निर्माण इस नगर की स्थापना से पूर्व ही हो गया था |

कुंतलगढ़, जयगढ़,  जंतर मंतर और नाहरगढ  पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है | 360 खिड़कियों वाला महल, हवामहल यहां वातानुकुलित मशीन के बिना भी ठंडी हवा खाई जा सकती है, नगर प्रसाद राजस्थानी एवं मुगल स्थापत्य शैली में बना है | इसका नाम चंद्रमहल भी है |

गोविंद जी का मंदिर, जयपुर का जादूगर और जलमहल है | इस महान में कुल 5 मंजिले है | चार झील के पानी में डूबी रहती है | सिसोदिया रानी का बाग, मोतीमहल आदि अन्य प्रमुख पर्यटन स्थल है |

 

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13. अंबर (amber rajasthan)

अंबर (amber rajasthan)

इस राजभर का निर्माण सन् 1592 महाराजा मानसिंह  ने शुरू करवाया था, जिसे 7 वर्षों पश्चात राजा जायसिंह ने पूरा करवाया था | इस किले का दोहरा दरवाजा पार कर पीछे की ओर बंगाल की आराध्य देवी काली मां का मंदिर है | राजा जय सिंह ने इस तरफ दर्द भरे कार्यक्रम को बंद करवाया दिया |

कहां जाता है तभी से रुष्ट हो देवी ने अपना मुख भाई और घुमा लिया | यह प्रतिमा अन्य काली प्रतिमाओं से कुछ हटकर है | आमतौर पर काली मां की प्रतिमाओं में मां के मुंह से निकल कर सुर्ख लाल रंग लिए लपलपाती जिन्हें इस प्रतिमा में नहीं है |

साथ ही अन्य प्रतिमाओं में मां के चरणों में लेटे भगवान शंकर भी इस प्रतिमा में दृश्य वन नहीं है | महाकाया अनोखा एवं भव्य दर्शन हत्यारों के रोम रोम को पुलकित कर देता है | इसके अलावा दीवान-ए-आम जनाना महल, जय मंदिर, यश मंदिर, स्मृति स्तंभ, आदि भी विशेष रुप से दर्शनीय है |

जयपुर से ब्राह्मण एवं विभिन्न राज्यों के लिए भी बस सेवा यहां उपलब्ध है | करने के इच्छुक पर्यटक पैलेस होटल, डीलक्स पार्क, होटल सम्राट, होटल ब्रॉडवे विलास,  होटल साबिर आनी, नारायण निवास पैलेस,  होटल नेहरु पैलेस,  रामगढ़ लॉज,  जयपुर होटल आदि अन्य होटलों में सुविधा अनुसार आप कर सकते हैं |

 

14. भरतपुर (bharatpur rajasthan)

भरतपुर (bharatpur rajasthan)



भरतपुर का प्राचीन भव्य किला आधुनिक समय में एक विश्वस्तर के सेंचुरी में बदल गया है | यहां पर अनेक प्रकार के पक्षी तथा तेंदुआ,  भालू ,नीलगाय, चिता, हिरन  आदि पाए जाते हैं |

विभिन्न पशु या पक्षियों को आप 6:00 बजे उसे 8:00 बजे तक देख सकते हैं | झील में नाव की सवारी का आनंद भी आप ले सकते हैं | वर्ल्ड सेंचुरी में बदला किला, अतीत में अजय था |

1730 ई में राजा सूरजमल ने भरतपुर की स्थापना की | भरतपुर किले पर विजय पाने के लिए अंग्रेजों को पूरे 4 महीने तक जी तोड़ मेहनत करनी पड़ी थी तब कहीं 1805 ई मे वह इस अजय किले को जीत पाए थे | किले में दो प्रवेश द्वार और 6 बुज है |

 

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15. अलवर (alwar rajasthan)

अलवर (alwar rajasthan)

यह शहर 1775 महाराजा राव प्रताप सिंह द्वारा बनवाया गया था | यहां का प्रमुख आकर्षण सिटी पैलेस है, जो कि अब म्यूजियम में परिवर्तित हो चुका है |

अस्त्रकार में विबिन्न महान बादशाहों के अस्त्रो को सुरक्षित रखा गया है |  यहां विशाल अस्तबल घोड़ों का नहीं  हाथियों का वह भी कोई दूसरों 400 नहीं पूरे 3000 आदमियों को रखा जाता था | यहां भी थाने की उत्तम व्यवस्था है |

 

16.सरिस्का (sariska rajasthan)

सरिस्का (sariska rajasthan)

 

इस अभ्यारण कौशल 1979 में टाइगर रिजर्व का दर्जा प्राप्त हुआ है | रात में अरणीय सफारी पैकेज टूर के अंतर्गत भ्रमण हेतु गाड़ी सर्वोत्तम साधन है | यहां सांभर, नीलगाय, भालू ,जंगली बिल्ली एवं भाग का दर्शन किया जा सकता है |इसलिय राजस्थान बहुत ही सुन्दर घूमने लायक स्थल है |

 

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How to reach Rajasthan | राजस्थान केसे पहुचे

रेल द्वारा | By Rail

राजस्थान तक पहुंचने के लिए, ट्रेन एक अच्छा विकल्प है। पूरे राज्य में 4600 किलोमीटर की रेलवे ट्रैक है, जिसका अर्थ है कि यह पूरे क्षेत्र में समान रूप से फैला हुआ है। यह व्यापक रेलवे नेटवर्क राज्य को आसानी से देश के बाकी हिस्सों से जुड़ने में सक्षम बनाता है। हालांकि, दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, कोलकाता, हैदराबाद और बेंगलुरु जैसे प्रमुख शहरों से सीधे संपर्क हैं।

यदि आप राजस्थान में सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थलों में असाधारण अवकाश यात्रा का अनुभव करना चाहते हैं, तो आपको पैलेस ऑन व्हील्स, रॉयल राजस्थान ऑन व्हील्स और महाराजा एक्सप्रेस को भी देखना चाहिए। ये लक्जरी ट्रेन राजस्थान में 3 से 7 रात्रि के सभी समावेशी दौरे देते हैं।

 

हवाईजहाज से | By Air

राजस्थान में दुनिया भर के कई शहरों के साथ अच्छी कनेक्टिविटी है और इसमें तीन प्रमुख हवाई अड्डा हैं घरेलू / अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए, जयपुर में एक हवाई अड्डा है। जयपुर से 260 किलोमीटर दूर दिल्ली में हवाई मार्ग पर राजस्थान के स्थलों तक पहुंचने के लिए एक अन्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा सबसे ज्यादा है। उदयपुर, जैसलमेर और जोधपुर में भारत के प्रमुख शहरों से जुड़े घरेलू हवाई अड्डा हैं।

 

Goa Flight



रास्ते से | By Road

राज्य राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बीस राष्ट्रीय राजमार्ग हैं जो 6373 किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करने वाले राज्य के आसपास साँप हैं सबसे प्रसिद्ध राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 8 है, जो दिल्ली, जयपुर, उदयपुर, अहमदाबाद, वडोदरा, मुंबई और कई अन्य लोगों से गुजरता है। दूसरे एनएसी राष्ट्रीय राजमार्ग एनएच 11, एनएच 3, एनएच 11 बी, एनएच 11 ए, एनएच 14, एनएच 12, एनएच 65, एनएच 15, एनएच 79, एनए 76, एनएच 89, एनएच 79 ए, एनएच 112, एनएच 90, एनएच 113, एनएच 116, और एनएच 114

इसके अलावा, बस से यात्रा करने वालों के लिएः राज्य में राजस्थान राज्य सड़क परिवहन निगम (आरएसआरटीसी) के नाम से सरकार ने पर्याप्त बस सेवाएं प्रदान की हैं और वह 49 साल से सेवा कर रही हैं। राज्य में 5000 से अधिक बसें और 56 डिपो हैं, जिनमें से तीन बसें दूसरे पड़ोसी राज्यों की यात्रा करते हैं। राजस्थान से कुछ प्रमुख पड़ोसी राज्य हैं, हरियाणा, गुजरात, पंजाब, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र।

Bus Booking

 

कार से | By Car

राजस्थान की अद्भुत परिदृश्य स्वाद के लिए एक सड़क यात्रा के लिए तैयार है। नीचे सूचीबद्ध हैं प्रमुख पड़ोसी राज्यों / शहरों और जयपुर और उदयपुर से उनकी दूरी (निर्भर है जो निकट है)।

नई दिल्ली-जयपुर: दूरी 274 किमी समय: 4 घंटे
हरियाणा-जयपुर: दूरी 303 कि.मी. समय 4 घंटे 36 मिनट
आगरा-जयपुर: दूरी 235 कि.मी. समय 4 घंटे 11 मिनट
अहमदाबाद-उदयपुर: दूरी 256 किमी समय 3 घंटे 44 मिनट
वडोदरा-उदयपुर: दूरी 355 किमी समय 4 घंटे 56 मिनट
सूरत-उदयपुर: दूरी 50 9 किमी समय 6 घंटे 58 मिनट
मुंबई-उदयपुर: दूरी 775 किमी समय 10 घंटे 53 मिनट

 

Hotels in Rajashtan | राजस्थान में होटल

एम्बर पैलेस (एम्बर किला)। पूर्व शाही निवास, जयपुर
सैमोड पैलेस, जयपुर सैमोड के ठाकुर के पूर्व निवास (महान उतरा) आज एक होटल है।
सिटी पैलेस, जयपुर जयपुर के महाराजा की सीट। अब एक संग्रहालयRajasthan hotels
रामबाग पैलेस, जयपुर- पूर्व शाही निवास, आज एक होटल।

सिटी पैलेस, उदयपुर उदयपुर के महाराणा की सीट अब एक संग्रहालय
जग निवास (लेक पैलेस), उदयपुर शाही खुशी का महल, अब एक होटल
जग मंदिर उदयपुर शाही खुशी का महल। (शाहजहां अपने पिता जहांगीर के साथ संघर्ष के दौरान राजकुमार के साथ शरण लेते थे)।
शिव निवास पैलेस, उदयपुर पूर्व शाही गेस्ट हाउस, अब एक होटल



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